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द्वितीय विश्व युद्ध 1939 से 1945 तक चलने वाला विश्व-स्तरीय युद्ध था। लगभग ७० देशो की थल-जल-वायु सेनाए इस युद्ध मे सम्मलित थी। इस युद्ध में विश्व दो भागो मे बटा हुआ था - मित्र राष्ट्र और धुरी राष्ट्र। इस युद्ध मे लगभग ६ करोड़ लोगो की जान गई, तथा यह मानव इतिहास का सवसे ज्यादा घातक युद्ध साबित हुआ। युद्ध के अंत मे मित्र राष्ट्रो की जीत हुई। द्वितीय विश्व युद्ध की शुरवात सितम्बर १९३९ मैं हुई जब जर्मनी ने पोलैंड पर हमला बोला और उसके बाद जब अमरीका , फ्रांस और इंग्लैंड ने जर्मनी पर हमला बोला । पृष्ठभूमिप्रथम विश्व युद्ध में हार के बाद जर्मनी को वेर्सल्लिएस की संधि पर जबरन हस्ताखर करना पड़ा । इस संधि के कारण उसे अपने कब्जे की बहुत सारी जमीन छोडनी पड़ी ; किसी दूसरे देश पर आक्रमण नही करने की शर्त माननी पड़ी ; अपनी सेना को सीमित करना पड़ा और उसपे प्रथम विश्व युद्ध मैं हुए नुकसान की भरपाई के रूप मैं दूसरे देशओं को भुकतान करना पड़ा । 1917 में रूस में ग्रह युद्ध के बाद सोवियत संघ का निर्माण हुआ जो की जोसफ स्तालिन के शःसन में था , 1922 में उसी समय इटली में बेनेतो मुस्सोलीनी का एकाधिपत्य राज्य कायम हुआ . 1933 में जर्मनी का शाशक अडोल्फ़ हिटलर बन गया और तुंरत ही उसने जर्मनी को वापस एक शक्तिशाली सन्य ताकत के रूप में प्रर्दशित करना शुरू कर दिया .इस बात से फ्रांस और इंग्लैंड चिंतित हो गए जो की पिछली लडाई मैं काफी कुछ हर चुके थे . इटली भी इस बात से परेशान था क्योंकि उसे भी लगता था की जर्मनी उसके काम में दखल देगा क्योंकि उसका भी सपना भी शक्तिशाली सन्य ताकत बनने का था. इन सब बातों को देखकर और अपने आप को बचने के लिए फ्रांस ने इटली के साथ हाथ मिलाया और उसे अफ्रीका मैं इथियोपिया जो उसके कब्जे में था उसे इटली को देने को तयार हो गया . 1935 में बात और बिगड़ गई जब हिटलर ने वेर्सल्लिएस की संधि को तोड़ दिया और अपनी सेना को बड़ी करने का काम शुरू कर दिया . जर्मनी को काबू में करने के लिए इंग्लैंड , फ्रांस और इटली ने स्ट्रेसा नामक शहर ( जो इटली में है ) में एक घोषणा-पत्र पे हस्ताक्षर किए जिसमे यह लिखा था की आस्ट्रिया की आज़ादी को कायम रखा जाए और जर्मनी को वेर्सल्लिएस की संधि तोड़ने से रोका जाए लेकिन स्ट्रेसा घोषणा-पत्र ज्यादा सफल नही हुआ क्योंकि तीनों राज्यों के बीच मैं आम सहमती ज्यादातर बातों पर नही बनी . उसी समय सोविएत संघ जो जर्मनी के पूर्वी यूरोप के बड़े हिस्से को कब्जा करने की मंशा से डरा हुआ था , फ्रांस से हाथ मिलाने को तैयार हो गया .
जर्मन सेना 1935 में नुरेम्बेर्ग में
जैसे जैसे समय बीतता गया तनाव बढता रहा और अपने आप को ताकतवर करने की कोशिशें बढती गई . तभी जर्मनी और इटली ने रोम -बर्लिन अक्ष-रेखा (ROME - BERLIN AXIS) बनाई और फिर जर्मनी ने जापान के साथ मिलकर साम्यवाद विरोधि करार (anti comintern pact ) किया जो चीन और सोविएत संघ के खिलाफ मिलकर काम करने का था और इटली भी इसमे १९४० में शामिल हो गया . युद्ध की शुरुवात 1937 में चीन और जापान मार्को पोलों में आपस में लड़ रहे थे । उसी के बाद जापान ने चीन पर पर पूरी तरह से धावा बोल दिया । सोविएत संघ ने चीन तो अपना पूरा समर्थन दिया . लेकिन जापान सेना ने शंघाई से चीन की सेना को हराने शुरू किया और उनकी राजधानी बेजिंग पर कब्जा कर लिया । 1938 ने चीन ने अपनी पीली नदी तो बाड़ ग्रस्त कर दिया और चीन को थोड़ा समय मिल गया सँभालने ने का लेकिन फिर भी वो जापान को रोक नही पाये । इसे बीच सोविएत संघ और जापान के बीच में छोटा युध हुआ पर वो लोग अपनी सीमा पर ज्यादा व्यस्त हो गए । यूरोप में जर्मनी और इटली और ताकतवर होते जा रहे थे और 1938 में जर्मनी ने आस्ट्रिया पर हमला बोल दिया फिर भी दुसरे यूरोपियन देशों ने इसका ज़्यादा विरोध नही किया । इस बात से उत्साहित होकर हिटलर ने सदतेनलैंड जो की चेकोस्लोवाकिया का पश्चिमी हिस्सा है और जहाँ जर्मन भाषा बोलने वालों की ज्यादा तादात थी वहां पर हमला बोल दिया । फ्रांस और इंग्लैंड ने इस बात को हलके से लिया और जर्मनी से कहाँ की जर्मनी उनसे वादा करे की वो अब कहीं और हमला नही करेगा । लेकिन जर्मनी ने इस वादे को नही निभाया और उसने हंगरी से साथ मिलकर 1939 में पूरे चेकोस्लोवाकिया पर कब्जा कर लिया . दंजिग शहर जो की प्रथम विश्व युद्ध के बाद जर्मनी से अलग करके पोलैंड को दे दिया गया था और इसका संचालन देशों का संघ (league of nations) ( लीग ऑफ़ नेशन्स ) नामक विश्वस्तरीय संस्था कर रही थी , जो की प्रथम विश्व युद्ध के बाद स्थापित हुए थी . इस देंजिंग शहर पर जब हिटलर ने कब्जा करने की सोची तो फ्रांस और जर्मनी ने पोलैंड को अपनी आजादी के लिए समर्थन देने को तैयर हो गए . और जब इटली ने अल्बानिया पर हमला बोला तो यही समर्थन रोमानिया और ग्रीस को भी दिया गया . सोविएत संघ ने भी फ्रांस और इंग्लैंड के साथ हाथ मिलाने की कोशिश की लेकिन पश्चिमी देशों ने उसका साथ लेने से इंकार कर दिया क्योंकि उनको सोविएत संघ की मंशा और उसकी क्षमता पर शक था . फ्रांस और इंग्लैंड की पोलैंड को सहायता के बाद इटली और जर्मनी ने भी समझौता पैक्ट ऑफ़ स्टील किया की वो पूरी तरह एक दूसरे के साथ है . सोविएत संघ यह समझ गया था की फ्रांस और इंग्लैंड को उसका साथ पसंद नही और जर्मनी अगर उस पर हमला करेगा तो भी फ्रांस और इंग्लैंड उस के साथ नही होंगे तो उसने जर्मनी के साथ मिलकर उसपर आक्रमण न करने का समझौता ( नॉन अग्ग्रेसन पैक्ट ) पर हस्ताक्षर किए और खुफिया तौर पर पोलैंड और बाकि पूर्वी यूरोप को आपस में बाटने का ही करार शामिल था . सितम्बर 1939 में सोविएत संघ ने जापान तो अपनी सीमा से खदेड़ दिया और उसी समय जर्मनी ने पोलैंड पर हमला बोल दिया . फ्रांस , इंग्लैंड और राष्ट्रमण्डल देशों ने भी जर्मनी के खिलाफ हमला बो दिया परन्तु यह हमला बहुत बड़े पैमाने पर नही था सिर्फ़ फ्रांस ने एक छोटा हमला सारलैण्ड पर किया जो की जर्मनी का एक राज्य था . सोविएत संघ के जापान के साथ युद्धविराम के घोषणा के बाद ख़ुद ही पोलैंड पर हमला बोल दिया . अक्टूबर 1939 तक पोलैंड जर्मनी और सोविएत संघ के बीच विभाजित हो चुका था . इसी दौरान जापान ने चीन के एक महत्य्वपूर्ण शहर चंघसा पर आक्रमण कर दिया पर चीन ने उन्हें बहार खड़ेड दिया . पोलैंड पर हमले के बाद सोविएत संघ ने अपनी सेना को बाल्टिक देशों (लातविया , एस्टोनिया , लिथुँनिया ) की तरफ मोड़ दी . नवम्बर 1939 में फिनलैंड पर जब सोविएत संघ ने हमला बोला तो युद्ध जो विंटर वार के नाम से जाना जाता है वो चार महीने चला और फिनलैंड को अपनी थोडी सी जमीन खोने पड़ी और उसने सोविएत संघ के साथ मोस्को शान्ति करार पर हस्ताक्षर किए जिसके तहत उसकी आज़ादी को नही छीना जाएगा पर उस सोविएत संघ के कब्जे वाली फिनलैंड की ज़मीन को छोड़ना पड़ेगा जिसमे फिनलैंड की 12 प्रतिशत जन्शंख्या रहती थी और उसका दूसरा बड़ा शहर य्वोर्ग शामिल था .
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